क्या होती है सरोगेसी जिससे प्रियंका चोपड़ा बनीं मां, भारत में क्या कहेता हे कानून?

प्रियंका चोपड़ाने अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में खुद बताया हे की प्रियंका और निक जोनस को माता-पिता बनने का यह सौभाग्य सरोगेसी के जरिए प्राप्त हुआ है। सरोगेसी तकनीक के सहारे मां बननी वाली प्रियंका अकेली नहीं हैं। इससे पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा, शिल्पा शेट्टी, शाहरुख खान, आमिर खान, करण जौहर, एकता कपूर और तुषार कपूर जैसे कई सितारे सरोगेसी की मदद से पैरेंट्स बन चुके हैं। आखिर सरोगेसी क्या होती है और भारत में इसके क्या नियम हैं? इसके बारेमे हम आपको बताएंगे।

क्या है सरोगेसी?
कपल को कोई मेडिकल से जुड़ी समस्या, गर्भधारण से महिला की जान को खतरा या कोई दिक्कत होने की संभावना है या फिर कोई महिला खुद बच्चा पैदा नहीं करना चाहती है। इसे हालात मे बच्चा पैदा करने के लिए जब कोई कपल किसी दूसरी महिला की कोख किराए पर लेता है तो इस प्रक्रिया को सरोगेसी कहा जाता है। अपनी कोख में दूसरे का बच्चा पालने वाली महिला को सरोगेट मदर कहा जाता है। सरोगेसी में कोई महिला अपने या फिर डोनर के एग्स के जरिए किसी दूसरे कपल के लिए प्रेग्नेंट होती है।

सरोगेट मां को प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ध्यान रखने और मेडिकल जरूरतों के लिए पैसे दिए जाते हैं ताकि वो गर्भावस्था में अपना ख्याल रख सके। सरोगेसी के लिए कपल और सरोगेट मदर के बीच एक एग्रीमेंट किया जाता है। प्रेग्नेंसी से पैदा होने वाले बच्चे के कानूनन माता-पिता सरोगेसी कराने वाले कपल ही होते हैं।

सरोगेसी के प्रकार:
जेस्टेशनल सरोगेसी जिसमें सरोगेट मदर का बच्चे से संबंध जेनेटिकली नहीं होता है। यानी प्रेग्नेंसी में सरोगेट मदर के एग का इस्तेमाल नहीं होता है। वो सिर्फ बच्चे को जन्म देती है। इसमें होने वाले पिता के स्पर्म और माता के एग्स का मेल या डोनर के स्पर्म और एग्स का मेल टेस्ट ट्यूब कराने के बाद इसे सरोगेट मदर के यूट्रस में प्रत्यारोपित किया जाता है। दूसरी ट्रेडिशनल सरोगेसी जिसमें होने वाले पिता या डोनर का स्पर्म सरोगेट मदर के एग्स से मैच कराया जाता है। इस सरोगेसी में सरोगेट मदर ही बॉयोलॉजिकल मदर होती है।

भारत में सरोगेसी के कानून:
ज्यादातर गरीब महिलाएं आर्थिक दिक्कतों के चलते सरोगेट मदर बनती थीं। सरकार की तरफ से 2019 में ही कॉमर्शियल सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाया गया था। जिसके बाद सिर्फ मदद करने के लिए ही सरोगेसी का विकल्प खुला रह गया है। कॉमर्शियल सरोगेसी को लेकर भी नियम-कायदों को सख्त कर दिया गया था।

इसके तहत विदेशियों और एलजीबीटी समुदाय से जुड़े लोगों के लिए सरोगेसी के रास्ते बंद कर दिए गए हैं। सरोगेसी का सहारा लेने वाले कपल के पास इस बात का मेडिकल प्रमाण पत्र होना चाहिए कि वो इनफर्टाइल हैं। सरोगेसी के लिए सरोगेट मदर के पास मेडिकल रूप से फिट होने का सर्टिफिकेट होना चाहिए। तभी वह सरोगेट मां बन सकती है।

 

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