विदेश में लाखो रूपए की वैभवी नोकरी छोड़कर इस भारतीय बेटी ने भारत में आकर जो किया उसे जानकर आपको भी गर्व होंगा… जानिए पूरी बात

इन दिनों ज्यादातर लोग बेहतर जीवन यापन करने के लिए विदेश जाने की योजना बना रहे हैं। बहुत से लोग विदेश जाकर अच्छा पैसा कमाते हैं, लेकिन वहा उन्हें हमारे देश की तरह शांति नहीं मिलती है। सोशल मीडिया और अपने आस-पास हमने कई मामले देखे हैं कि बहुत से लोग विदेशों में लाखों रुपये की नौकरी छोड़ देते हैं और भारत आकर छोटे बड़े काम शुरू करते हैं।

ऐसी ही कहानी अंकिता कुमावत की है, जिन्होंने एक भारतीय प्रबंधन संस्थान से पास आउट होकर पांच साल तक अमेरिका और जर्मनी में काम किया था। उन्होंने लाखों रुपये का पैकेज छोड़ा और अजमेर में खेती और पशुपालन का बिजनेस शुरू किया था। इस बात का सुनकर कष्टप्रद लग सकता है, लेकिन अगर सच्ची इच्छा और विश्वास हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।

अंकिता के पिता भी पशुपालन से जुड़े थे। उन्होंने अंकिता को कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में कुछ नया करने की सलाह भी दी। बस वहीं से इसे एक नई दिशा मिली और आज अंकिता नाका मदार में जैविक खेती कर रही है और देसी गायों को रख कर लोगों तक न सिर्फ केमिकल मुक्त सब्जियां पहुंचा रही है बल्कि शुद्ध दूध, मक्खन, देसी-घी, मावा और अन्य दुग्ध उत्पाद भी पहुंचा रही है।

अंकिता के इस स्टार्टअप के जरिए वह हर महीने 1 से 1.5 लाख रुपए की शुरुआती कमाई कर रही हैं। अंकिता ने शुरू से ही तय कर लिया था कि वह अपना खुद का बिजनेस चलाकर एक बड़ी व्यक्ति बनेगी। यही वजह है कि अंकिता की टीम में सीएस, एमबीए, बीएससी-एमएससी समेत अन्य उच्च शिक्षित युवा हैं। इस काम में अंकिता की मां शशि कुमावत और पिता फुलचंद कुमावत भी उनकी मदद कर रहे हैं।

अंकिता यह काम मैटरनिटी डेयरी के जरिए कर रही हैं। अंकिता ने 5 साल पहले अपनी नौकरी छोड़ दी और “मैटरनिटी डेयरी” नाम से डेयरी फार्मिंग शुरू की। उन्होंने अपने पिता की प्रेरणा और सहयोग के बाद यह काम शुरू किया था। आज अंकिता की कंपनी को करीब 7 साल हो गए हैं और इन 7 सालों में उनकी कंपनी का टर्नओवर 90 लाख तक पहुंच गया है।

आपको बता दे की अंकिता को तीन साल की उम्र में पीलिया हो गया था। डॉक्टर ने अंकिता को शुद्ध फल और शुद्ध दूध लेने को कहा लेकिन अंकिता के पिता को शुद्ध दूध नहीं मिल रहा था। जिसके बाद उन्होंने अपनी गाय को शिफ्ट किया और अंकिता जल्द ही ठीक हो गई। जिसके बाद उनके दिमाग में दूध के साथ एक और उत्पाद का विचार आया लेकिन वह अपनी नौकरी के कारण यह काम शुरू नहीं कर सकीं थी।

अंकिता का कहना है कि जर्मनी और अमेरिका में पांच साल अच्छी कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह गांव आएं और अपने पिता की मदद करें। साल 2014 में अंकिता अजमेर आई और अपने पिता के साथ डेयरी फार्मिंग और ऑर्गेनिक फार्मिंग शुरू की थी।

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