अदरक का इस तरीके से नियमित किया गया उपयोग कई रोगों को रखता हे कोसों दूर…

साग-सब्जी में अदरक का प्रयोग अक्सर किया जाता है। अलग से भी कुछ विशेष रूप में इसका प्रयोग नित्य किया जा सकता है और खास परिस्थितियों में भी।

अदरक का शरबत: थोड़ी-सी अदरक कुचलकर उसका रस निकाल लें। रस को महीन छलनी से छान लें ताकि अदरक के रेशे निकल जाएं। अब चीनी का सादा शरबत तैयार करें। एक किलो चीनी में सवा किलो पानी डालकर आंच पर चढ़ा दें। शरबत को एक तार खिंचने तक पकाएं। इसी बीच आधा चम्मच फिटकिरी पीसकर शरबत में डाल दें। फिटकिरी की शक्ति के कारण शरबत जमता नहीं है। इस शरबत में अदरक का तैयार रस डालकर मिला लें। फिर इस शरबत को बोतल में भरकर रख लें। पेट के तमाम रोगों के लिए यह शरबत रामबाण है।

अदरक का अचार: सबसे पहले अदरक को छीलकर दो-तीन बार पानी से उसे भली-भांति धो लें। इसके बाद इसके छोटे-छोटे टुकड़े या छल्ले काट कर एक बार में उबाल लें। अब इन टुकड़ों को पानी से निकाल कर कपड़े पर छांव में सुखा लें।

सूख जाने के बाद अदरक के टुकड़ों में नमक, काली मिर्च और लाल इलायची का चूर्ण अन्दाज से डालें। अदरक के टुकड़े एक किलो हैं तो उसमें 15 ग्राम मसाला तथा 25 ग्राम पिसा हुआ नमक डालना चाहिए। मसाला तथा नमक टुकड़ों में अच्छी तरह मिलाएं। अब इन टुकड़ों को मर्तबान में भर दें। ऊपर से नीबू का रस डालें। रस इतना डालें कि टुकड़े उसमें डूब जाएं। ऊपर से दो चम्मच सफेद सिरका डाल दें। सिरके को मर्तबान हिलाकर मिला लें। अब अचार को हल्की धूप दिखाएं।

अदरक के लड्डू: सबसे पहले अदरक की छोटी-छोटी गांठों को धूप में अच्छी तरह सुखा केलें। या फिर तैयार सोंठ ले आएं। इस सोंठ को दो दिन धूप में सुखाकर कूट पीसकर कपड़छन कर लें। बाजार में पिसी हुई सोंठ भी मिलती है। लेकिन वह लड्डुओं के लिए ठीक नहीं रहती।

अब इस सोंठ के चूर्ण को सूखी कड़ाई में हल्की आंच पर भून लें। इसमें थोड़ा सा भुना हुआ गेहूं का आटा तथा शक्कर मिला लें। सफेद इलायची तथा लौंग का चूर्ण भी एक चम्मच की मात्रा में मिलाएं। फिर सब चीजों के छोटे छोटे लड्डू बांध ले।

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