UP के बाहुबली: मठ के महंत से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री बनने तक की सफर…

योगी आदित्यनाथ जी का नाम वैसे तो कई बार सुर्खियों में रहते है। लेकिन सबसे ज्यादा उनको सुर्खियों तब देखा गया जब उनका नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप घोषित किया गया था। सन् 19 मार्च 2017 रविवार के दिन उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। अब उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पाँच वर्ष भी पुरे कर लिए है। योगी आदित्यनाथ जी ने भारतीय जनता पार्टी की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान अपने हाथों में ली थी। सबसे पहले सन् 1998 में भारत के बारहवें लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सबसे कम उम्र में सांसद के रूप में शपथ ली थी। तब उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी।

26 वर्ष की आयु में वह 12वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद (गोरखपुर) बने। 1998 से 1999 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्य आपुर्ति व नागरिक आपुर्ति की उप समिति बी में कार्यरत रहे। इसके साथ उन्होंने शर्करा और खाद्य तेल विभाग में भी कार्य किया। वह गृह मंत्रालय की सलाहकार समिति के भी सदस्य रहे। वह 13वीं लोकसभा (दुसरे कार्यकाल) गोरखपुर क्षेत्र से पुनः चुने गए। 2004 मे 14वीं लोकसभा (तीसरे कार्यकाल) गोरखपुर क्षेत्र से दोबारा चुने गए। जहाँ उन्होंने सरकारी आश्वासन समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया।

इसके साथ-साथ विदेश मामलो की समिति में भी सदस्य के रूप में कार्य किया। 2009 मे 15वीं लोकसभा (चौथे कार्यकाल) गोरखपुर क्षेत्र से पुनः चुने गए। जहाँ उन्होंने परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी समितियों में कार्य किया। बाद मे गोरखपुर निर्वाचन क्षेत्र से 16वीं लोकसभा (पाँचवे कार्यकाल) में फिर से निर्वाचित हुऐ। 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के 21 वें मुख्यमंत्री बने।

योगी अन्य धार्मिक लोगो के धर्मांतरण कराने के लिए विवादों में रहे है। 2005 में, आदित्यनाथ ने कथित रूप से एक शुद्धि अभियान का नेतृत्व किया जिसमें ईसाइयों को हिंदू धर्म के रूपांतरण में शामिल किया गया था। एक ऐसे उदाहरण में, उत्तर प्रदेश के ऐटा शहर में 1800 ईसाई कथित रूप से हिंदू धर्म में परिवर्तित हो गए थे। जनवरी 2007 में गोरखपुर में मुहर्रम के दौरान एक हिंदू समूह और मुसलमानो के बीच में विवाद होने से (राज कुमार अग्रराही) नामक व्यक्ति के घायल होने पर आसपताल में भर्ती कराया। जिसके बाद उन्हें उन उत्तेजक भाषणों के लिए गिरफ्तार किया गया जिनकी वजह से गोरखपुर में दंगे भड़के।

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में लोगों की बहुत आस्था है। मकर संक्राति में हर धर्म के लोग इस मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने आते है जिसके चलते यह लोंगों आस्था का क्रेन्द्र बना और मंहत दिग्विजय नाथ ने इस मंदिर को 52 एकड़ में फैलाया। जिसके बाद मंहत अवैद्यनाथ ने इसको आगे बढ़ाया। महंत अवैद्यनाथ ने इसके बाद अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ को बनाया जिसके लिए सन् 1998 में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और जीत गये।

 

 

 

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