उनकी एक ट्र‍िक ने पलट दी क‍िस्‍मत, फल बेचने वाले के बेटे ने खड़ा क‍िया 300 करोड़ का साम्राज्‍य…

एक व्‍यक्‍त‍ि की सफलता उसकी आने वाली पीढ़‍ियों की द‍िशा और दशा दोनों तय करती है। सफलता क‍िसी की मोहताज नहीं होती। बस इसके लिए जरूरत होती है आपकी लगन और दुन‍िया से कुछ अलग करने की। आपने एक बार ऐसा क‍िया तो न‍िश्‍च‍ित ही कामयाबी आपके कदम चूमेगी। आज हम आपको एक ऐसे शख्‍स के बारे मे बता रहे हैं जो खुद गरीब घर में पैदा हुआ लेक‍िन उसने आने वाली पीढ़‍ियों के लिए कामयाबी की इबारत ल‍िख दी और खड़ा कर द‍िया अरबों का साम्राज्‍य।

रघुनंदन श्रीनिवास कामत: उनके पिता फल और लकड़ियां बेचकर 7 बच्चों का पेट पालते थे। कामत बड़े होने पर पर‍िवार की ज‍िम्‍मेदार‍ियां उठाने के लिए भाईयों के साथ मुंबई चले गए। कर्नाटक में पैदा हुए कामत का जन्‍म गरीब पर‍िवार में हुआ। इसके बावजूद उन्‍होंने ह‍िम्‍मत नहीं हारी और अपनी मेहनत व लगन के दम पर अरबों रुपये का साम्राज्‍य खड़ा कर द‍िया।

गोकुल नाम से ढाबा चला रहे कामत के भाईयों ने उन्‍हें भी वहीं काम पर लगा लिया। ढाबे पर ग्राहकों को आइसक्रीम खरीदते देखकर कामत के मन में आइसक्रीम का बिजनेस शुरू करने का न‍िर्णय ल‍िया। हालांक‍ि यह उनके ल‍िए जोख‍िम भरा कदम था। इसके बाद उन्‍होंने 14 फरवरी 1984 को जूहू में Naturals Ice Cream Mumbai के नाम से आउटलेट की शुरुआत की। उनकी आइसक्रीम की खास‍ियत थी क‍ि उसका टेस्‍ट एकदम नेचुरल था। लेक‍िन उनके आइसक्रीम पार्लर पर ज्‍यादा लोग नहीं आते थे।

इस एक ट्र‍िक ने कर दिया काम: अपनी आइसक्रीम को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए कामत ने आइसक्रीम के साथ मसालेदार पाव भाजी का काम शुरू कर दिया। पावभाजी खाने के लिए आने वाले लोग तीखा खाकर कामत की ठंडी और मीठी आइसक्रीम खाते। यही से धीरे-धीरे उनकी आइसक्रीम को असली पहचान मिलने लगी।

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार आज पूरे देश में उनके 135 आउटलेट हैं। 5 फ्लेवर्स से शुरू हुई ये आइस्‍क्रीम कंपनी आज 20 फ्लेवर्स की आइसक्रीम लोगों तक पहुंचा रही है। कामत की कंपनी नेचुरल आइस्‍क्रीम ने आज पूरे देश में पहचान बना ली है।

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