आठवी फैल लड़के ने खड़ी कर दी 2 हजार करोड़ की कंपनी, आज मुकेश अंबानी जैसे बिजनेसमैन है ग्राहक

दोस्तो आज हम बात कर रहे हैं त्रिशनित अरोड़ा की, जिन्होंने 8वीं में फेल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और आज करोड़ों के मालिक बन गए हैं। त्रिशनित का जन्म 2 नवंबर 1993 को लुधियाना (पंजाब) में हुआ था। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे त्रिशनित अरोड़ा का बचपन से ही पढ़ने का कोई इरादा नहीं था लेकिन हाँ, उन्हें कंप्यूटर में इतनी दिलचस्पी थी कि वह अपना सारा समय उनमें बिताते थे और अन्य विषयों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते थे।

फिर हुआ यूँ कि कंप्यूटर के प्रति आकर्षण और विषयों में अनुत्तीर्ण होने के कारण मम्मी-पापा को बहुत गुस्सा आया। दोस्तों और परिवार वालों ने भी उनका मजाक उड़ाया लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद त्रिशनितने पढ़ाई छोड़ दी और अपना पूरा ध्यान कंप्यूटर पर लगा दिया और साथ ही साथ वे कंप्यूटर और हैकिंग के क्षेत्र में गहराई से शामिल हो गए। हालांकि, उनके माता-पिता को यह सब पसंद नहीं आया। जिसके बाद त्रिशनित ने कंप्यूटर शौक में अपना करियर बनाने का फैसला किया और इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया।

फिर उसने कुछ ऐसा करने के लिए कड़ी मेहनत की जिसके बारे में बहुत कम लोग सोच सकते है। हा, 7 साल की उम्र में, उन्होंने अपने विचार को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आज त्रिशनित करोड़पति बन चुके हैं और उनके ग्राहक मुकेश अंबानी देश-विदेश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार हैं। भले ही आप यह जानकर चौंक गए हों, लेकिन त्रिशनित अरोड़ा ने वास्तव में 19 साल की उम्र तक कंप्यूटर फिक्सिंग और सॉफ्टवेयर की जानकारी प्राप्त कर ली थी।

त्रिशनित को अपने पहले प्रोजेक्ट के लिए 60,000 रुपये मिले थे। जिसके बाद उसने अपने पैसे जोड़कर सिक्योरिटी सॉल्यूशंस नाम की कंपनी शुरू की। समय के साथ उनकी कंपनी देश की शीर्ष कंपनियों में से एक बन गई और वह एक सफल करोड़पति बन गए। अब यह बात सामने आई है कि रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस, गुजरात पुलिस, अमूल और एवन साइकिल जैसी कंपनियां भी साइबर कनेक्टेड सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जैसे हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा, द हैकिंग एरा, और हैकिंग विद स्मार्ट फोन्स, जिनमें से सभी को व्यापक रूप से पढ़ा गया है।

त्रिशनित के बिजनेस की बात करें तो उनकी कंपनी के ऑफिस दुबई और यूके में हैं। लगभग 70% ग्राहक इस कार्यालय से संबंधित हैं। उन्होंने उत्तर भारत की पहली साइबर इमरजेंसी रिस्पांस टीम की स्थापना की। उनका कहना है कि शौक के आगे सब कुछ छोटा होता है और कामयाबी वहीं होती है जहां काम करने का जुनून हो।

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