राकेश शर्मा अंतरिक्ष मे अपने साथ क्या क्या ले गए थे? जानिए उसके बारे मे कुछ रोचक बाते…

13 जनवरी 1949 को पटियाला में जन्मे राकेश शर्मा, अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले, भारतीय सशस्त्र बलों में वायु सेना के पायलट के रूप में काम करते थे। वह अप्रैल 1984 में रूस के सोयुज टी-11 स्‍पेसक्राफ्ट में अंतरिक्ष में परिक्रमा करने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने दो सोवियत अंतरिक्ष यात्रियों, यूरी मालिशेव और गेनाडी स्ट्रेकालोव के साथ अंतरिक्ष में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट बिताए।

अंतरिक्षयात्रा से लौटने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा था कि भारत ऊपर से कैसा दिखता है। उन्‍होंने जवाब दिया, “मैं बिना किसी हिचकिचाहट के कह सकता हूं, सारे जहां से अच्छा हिंदोस्‍तान हमारा। ” विंग कमांडर राकेश शर्मा का नाम देशभर में बच्‍चे-बच्‍चों को याद है। भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च वीरता पुरस्कार – अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय होने के अलावा, राकेश शर्मा पहले ऐसे भारतीय भी हैं जिन्हें ‘सोवियत संघ के हीरो’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

जनवरी 1982 में, जब यह निर्णय लिया गया कि एक सोवियत अंतरिक्ष जहाज पर एक भारतीय अंतरिक्ष में जाएगा, स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा ने इस बहुत ही चुनौतीपूर्ण मिशन के लिए स्वेच्छा से भाग लिया। उन्हें भारतीय वायु सेना के 150 योग्य और अनुभवी पायलटों में से दो अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवारों में से एक के रूप में चुना गया था। अपने चयन के बाद, उन्होंने USSR में यूरी गगारिन सेंटर में एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ खुद को साबित किया और सोवियत अंतरिक्ष विशेषज्ञों से प्रशंसा भी पाई।

राकेश शर्मा मैसूर स्थित डिफेंस फूड रिसर्च लैब की मदद से भारतीय भोजन को अंतरिक्ष में ले गए। उन्होंने सूजी का हलवा, आलू छोले और वेज पुलाव पैक किया था जिसे अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ शेयर भी किया। शर्मा अपने साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राष्ट्रपति जैल सिंह, रक्षामंत्री वेंकटरमण और राजघाट की मिट्टी, महात्मा गांधी की समाधि के चित्र ले गए थे।

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