गाववालों ने किया परेशान, पिता को किया शिक्षा रुकवाने के लिए मजबूर, फिरभी इस लड़के ने जो हाँसिल किया वो जान कर आप चौंक जाएंगे

दुनिया के कई प्रतिक्षत लोग भारत सरकार की सबसे अहम और अमूल्य नोकरी आईएएस की परीक्षा देते हे| परन्तु तो सफलता तो उसिको ही मिलती हे जो मन लगाकर दीन-रात मेहनत करके अपने लक्ष्य को हासिल करने की तेवर रखता हे और जो पूरा अपना ध्यान केवल सिर्फ अपनी पढ़ाई मे रखता हे| आर्थिक, सामाजिक और व्यावहरिक चुनोतीयो को सामना करने की वो अपना इतिहास लिखते हे| बहुत से एसे लोग हे जो बचपन से ही कई परेशनियो का सामना करके वो सफलता को हासिल करते हे| आज वह शखस हम सबके के बीच एक सफल ऑफिसर के रूप मे हमारे साथ हे|

एक सफल आईएएस ऑफिसर अंसार शेख का जन्म स्थान महाराष्ट्र के छोटे से गाव शेलगाव मे हुआ| उनके पिता दीन रात ऑटो चलाते हे और मा मजदूर थी| बचपन से ही दो वक्त की रोटी के लिए लिए संघर्ष करते हुए वे बड़े हुए| एक बंजर इलाका होने की वजह से यहा खेती करना बड़ा ही मुश्किल था| गाव के ज्यादातर लोग शराब के नशे मे धुत थे| असार के पिता नशे मे धुत होकर आधी रात को घर आकर आस पास के लोग लड़ते और गाली गलोच करके सबसे लड़ते थे| इनके सबके के बीच रहके असार ने अपनी बाल उम्र मे ही शिक्षा की जरूरत को मॅप लिटा था| आर्थिक स्थितियों को देखकर गाववालोंने अंसार के पिता को अपने बेटे की पढाई रुकवाने के लिए कहा|

जब अंसार अपनी चौथी कक्षा के समय को याद करके कहा की , तब मेरे रिश्तेदारोने और गाव वालोंने मेरे पिता मेरी पढ़ाई रुकवाने के लिए दबाव डाला| असार बचपन से ही एक होनहार लड़का था जो अपनी जीमेदारी को समजता था| जब उनके पिता ने उनकी पढ़ाई बंद करवाने के लिए एक शिक्षक से संपर्क किया तो, उनके पिता को संजय की आपका बच्चा बोहोत ही होनहार हे और इसमे खुदका और आपका पारिवारिक स्थितियों को बदलनेकी क्षमता रखता हे| इन सबकी की बाते सुनकर उनके पिता ने असार को पढ़ाई लिखाई के अनुमति दी| इन सबसे असआर को अपने जीवन मे कुछ करने की और अपना लक्ष्य को हासिल करने का होसला मिल|

अपनी भूख को मिटाना अंसार के लिए बहुत कठिन हो गया था जब वे किसी जिल्ला परिषद मे अपनी शिक्षा प्राप्त करते थे| यहा के भोजन अकसर उनको खाने मे कीड़े मिलते थे, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने अपनी जीमेदारियों को ध्यान मे रखते हुए वो ख लेते थे| समय बीतता गया और उन्होंने अपनी बारहवी कक्षा मे 91 फीसदी अंक लाकर अपने और परिवार का नाम रोशन किया| यह उनकी सफलता का पहला पड़ाव था जो उन्होंने पार कर लिया| बारहावी मे उनके अभूतपूर्व प्रदशन को देखकर सिर्फ उनका परिवार का विश्वास जीत और पूरे गाव मे उन्होंने एक अतिहासिक सिद्धि प्राप्त की|

अंसार की केवल एक ही कमजोरी थी वो थी अंग्रेजी, फिर भी उन्होंने प्रबल प्रयास किए| अपने घरवालों की मदद से उन्होंने पुणे के नमकिनत फर्गुसन कॉलेज मे दाखिल हासिल किया| उनके पिता हर महीने मेहनत करके अपनी कमाई का कुछ हिस्सा अपने बेटे असार को भेजेते और अपना गुजारा चलाते| कॉलेज के पहले ही वर्ष मे उन्हे यूपीएससी परीक्षा के बारे मे जानकारी मिली और फिर क्या उन्होंने थान लिया और उसे ही अपने जीवन एक मात्र लक्ष्य बना लिया| उन्होंने सखत परिश्रम और मेहनत करके साल 2015 मे रिजल्ट घोषित हुए तो उनकी महँ का साक्षी हर कोई था| उन्होंने 21 वर्ष की युवा उम्र मे अपने पहले पड़ाव मे सफलता को चूम लिया था और देशके करोड़ों युवा के सामने एक एतिहासिक मिशल पेश की| सब परिस्थतियों का हवाला देकर जो लोग अपने लक्ष्य से मुह मेड लेते हे , लेकिन असआर शेख की सफलता उनके लिए एक मिसाल की तोर पर सामने हे| यदि आप मजबूत इच्छाशकत्ती के साथ आगे बढ़ते तो सफलत्ता अवश्य आपकी ही होती हे|

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