कभी 50 रुपए थी तारक मेहता शो के इस कलाकार की कमाई, आज बन गया है 2 रेस्टोरेंट का मालिक…

एक्टिंग की दुनिया एक ऐसी इंडस्ट्री है जहां हर कोई अपनी किस्मत आजमाना चाहता है। लेकिन सफलता हर किसी को नहीं मिलती है और यह उतना आसान भी नहीं है जितना हम सोचते हैं। आज हम ऐसी ही एक अभिनेता के बारे में बात करने जा रहे है, जिसके लिए भी अभिनय क्षेत्र में काम करना आसान नहीं था। जी, हां हम बात कर रहे है ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ फेम अब्दुल की।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के अब्दुल यानि शरद शकला को एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 25 साल से ज्यादा का समय हो गया है। इतने सालों तक इंडस्ट्री से जुड़े रहने के बावजूद उन्हें पहचान नहीं मिल पाई थी। एक समय में उन्हें एक दिन में 50 रुपये मिलते थे, लेकिन आज अब्दुल के मुंबई में दो रेस्तरां हैं।

शरद ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए कहा कि उनकी पहली कमाई 50 रुपये प्रतिदिन थी। 35 से अधिक फिल्मों और दर्जनों शो में काम करने के बाद भी उन्होंने अपना नाम बनाने के लिए संघर्ष किया था। शरद के अनुसार, उन्होंने 1990 में फिल्म राजवंश के साथ मनोरंजन उद्योग में अपनी शुरुआत की थी।

इस फिल्म में उन्होंने चार्ली चैपलिन की भूमिका निभाई थी, जो एक बहुत ही युवा चरित्र था। उस समय उन्हें 50 रुपये प्रतिदिन मिलते थे। इसके बाद उन्होंने खिलाड़ी, बाजीगर और बादशाह जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया था।

फिर भी, वे आठ साल तक बेरोजगार रहे। शरद के मुताबिक आठ साल तक जब उनके पास कोई नौकरी नहीं थी तो उन्होंने उनका पोर्टफोलियो लेकर प्रोड्यूसर के पास नौकरी मांगने के कोई घूमना पड़ता था, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली।

इसलिए अपने और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने सहायक निर्देशक, कोरियोग्राफर और कास्टिंग निर्देशक के रूप में काम करना शुरू किया था। इस बीच कई छोटे-छोटे रोल करने के बाद भी मुझे कोई बड़ा काम नहीं मिला। इसके बाद उन्हें तारक मेहता का उल्टा चश्मा में नौकरी मिल गई और उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

तारक मेहता का उल्टा चश्मा में काम मिलने के बारे में पूछे जाने पर शरद ने कहा कि वह और तारक मेहता का उल्टा चश्मा के निर्माता असित मोदी कॉलेज में एक ही बैच में बैठते थे।

एक दिन असित मोदी ने उन्हें अब्दुल की भूमिका के लिए कोल किया था। उस पर अब्दुल ने कहा मेरे पास उस समय हाँ कहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। शुरुआत में महीने में 2-3 दिन शूट करता था, लेकिन मेरा किरदार फेमस हो गया और लोग मुझे शरद नहीं अब्दुल कहने लगे।

अब्दुल के नाम से मशहूर शरद के मुंबई में दो रेस्टोरेंट हैं। शरद ने कहा कि वह अपनी पत्नी और बच्चों के लिए जिम्मेदार हैं। मुझे नहीं पता कि तारक मेहता कब तक चालू रहेंगा। ऐसी स्थिति में मेने पैसों का निवेश किया है।

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