मुसाफ़री के दौरान होती हे उल्टीया, राहत पाने के लिए आज ही अपनाए ये घरेलू नुस्खे…

वमन या उल्टी अजीर्ण रोग का एक लक्षण माना जाता है। कई बार देखा गया है कि खाली पेट में गैस या विकार भर जाता है जो उबकाई के रूप में प्रकट होता है। उसमें कड़वा पित्त या अम्ल निकलता है। यदि उस समय पानी पी लिया जाए तो वह भी पेट में नहीं रुकता और उल्टी होकर बाहर निकल जाता है। यह वमन बदबू भरा होता है, जिसको दुर्गंध कुछ दूर तक फैलती है। रोगी स्वयं उस दुर्गंध के कारण बेचैन हो जाता है।

कारण: मनुष्य के पेट में मांसपेशियों का संकुचन तथा मेदे में कार्डिअक छेद हो जाता है। इस वजह से आंतें कमजोर हो जाती हैं और पित्त ग्रहण नहीं कर पातीं। वायु उस पित्त को ऊपर की ओर ले जाती है जो उल्टी के रूप में बाहर निकल जाता है।

पहचान: पेट के भीतर का विषैला पानी, विकारयुक्त भोजन तथा अनपचा दूध आदि उल्टी के रूप में बाहर आता है। उल्टी में दुर्गंध होती है। रोगी को बेचैनी, घबराहट, मुंह का स्वाद फीका व कड़वा, छाती में भारीपन, पेट में जलन, आंखों के सामने अंधेरा आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। कुछ रोगियों के मुख में खुश्की आ जाती है। जीभ पर मैल के कांटे उग आते हैं।

नुस्खे: गन्ने के रस में जरा-सा बर्फ तथा आधा नीबू निचोड़ कर पीने से उल्टी रुक जाती है। पानी में चार-पांच बूंदें अर्क पुदीना और जरा-सा कपूर डालकर पी लें। आम की पापड़ी खाने से दस्त और उल्टी दोनों में आराम मिलता है। एक चुटकी हींग और चार लौंग को पीसकर आधे कप पानी में घोलकर पीने से उल्टी रुक जाती है।

एक चम्मच प्याज का रस, एक चम्मच नीबू का रस तथा आधा चम्मच पुदीने का रस-तीनों को मिलाकर दो खुराक करें। इसे सुबह-शाम लें। जायफल को पानी में घिस लें। एक चम्मच भर जायफल का जल चावल के मांड़ में मिलाकर सेवन करें। हरा धनिया तथा पुदीना दोनों की चटनी बनाकर उसमें भुने हुए जीरे का चूर्ण 4 ग्राम, काला नमक 2 ग्राम एवं कालीमिर्च 1 ग्राम मिलाकर सेवन करें। सूखे अनारदाने को पानी में दो घंटे तक भिगोए रखें। फिर पानी को निचोड़ या छानकर जरा-सा मीठा डालकर पी जाएं।

यदि पेट में पित्त बढ़ जाने के कारण वमन आ रहा हो तो गन्ने के रस में दो चम्मच शुद्ध शहद डालकर सेवन करें। कागजी नीबू का रस दो चम्मच, नीम का पानी एक चम्मच तथा एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें। मुलहठी का चूर्ण खाने या मुलहठी का जल पीने से वमन में तुरंत लाभ होता है।

क्या खाएं क्या नहीं: वमन या उल्टी करने वाले रोगी को औटाए हुए पानी में चार-पांच तुलसी की पत्तियां डालकर तथा ठंडा करके पिलाते रहें। पानी में नीबू डालकर भी पिलाया जा सकता है। नीबू के एक टुकड़े पर जरा-सी कालीमिर्च और जरा-से काले नमक का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। भूख लगने पर मूंग की दाल की खिचड़ी दही या मट्ठे के साथ दें। गरमी तथा जाड़े में स्नान अवश्य करें। यदि शरीर अधिक कमजोर हो तो गीले कपड़े से शरीर पोंछ लें। शरीर का पोंछना टॉनिक का काम करता है। यदि किसी गर्भवती स्त्री को वमन की शिकायत हो तो उसे आलूबुखारा का फल खाने को दें। भरपेट भोजन न करें। भूख लगने पर भी थोड़ा थोड़ा भोजन लें।

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