जेलर- कल तुम्हें फांसी होगी…, बताओ तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है? कैदी- मैं तरबूज खाना चाहता हूं. जेलर- लेकिन ये तरबूज का मौसम नहीं है. कैदी-….

मेरी मां और मेरी पत्नी को कभी भी मेरे ऊपर विश्वास दिलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती.
क्योंकि मेरी भोली मां मेरे पर कभी शक नहीं करतीं.
और मेरी पत्नी वो कभी मेरे ऊपर यकीन नही करती.

नाराज गर्लफ्रैंड अपने बॉयफ्रैंड से कहती है,
कॉल करने वालों को फांसी दी जाएगी,
मिस कॉल जो करेंगे उन्हें गोली मार दी जाएगी,
तुम क्यों डरते हो तुम तो मैसेज भी नहीं करते तुम्हारी तो आरती उतारी जाएगी.

पत्नी बोली मैं कभी भी अपने पति में भेदभाव नहीं करती.
सामने बैंगन हो या मेरे पति दोनों का भरता बना देती हूं.

जेलर- कल तुम्हें फांसी होगी…, बताओ तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है?
कैदी- मैं तरबूज खाना चाहता हूं.
जेलर- लेकिन ये तरबूज का मौसम नहीं है.
कैदी- कोई बात नहीं, मैं इंतजार कर लूंगा.

पत्नी- हाय राम आपके सर से खून क्यों निकल रहा है?
पति- मेरे एक दोस्त ने मुझे ईंट मार दी.
पत्नी- आप भी मार देते, आपके हाथ में कुछ नहीं था क्या?
पति- था न, उसकी बीवी का हाथ.
फिर क्या, पत्नी ने भी दो ईंट मार दी उसके सर पर.
अब बेचारा पति अस्पताल में भर्ती है.

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