इस चीज का देश की आर्थिक और औद्योगिक उन्नति में भी महत्त्वपूर्ण स्थान हे, उसे गरीबों का मेवा कहा जाता है…

मूंगफली की गिनती भी सूखे फलों अथवा गिरी या मेवों में आती है। मूंगफली की मूंगफली की गिनत इसलिए की जाती है क्योंकि यह पौष्टिकता से भरपूर हे। यह इतनी स्वादिष्ट होती है कि एक बार खाना प्रारम्भ कर दें तो छोड़ना मुश्किल होता है। केवल मूंगफली एक ऐसा गिरीदार फल है जो भूमि के नीचे पैदा होता है। मूंगफली धरती पर बेल के समान फैलती है। जब इसके पत्ते पीलापन लेने लगते हैं तो समझा जाता है कि मूंगफली पक गई। उस समय मूंगफली की बेल को काटकर अलग कर दिया जाता है और 5-6 सप्ताह तक उस धरती को सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है जिसमें मूंगफली पैदा होती है।

मूंगफली आज संसार के अनेक भागों में बहुतायत से पैदा होती है। यह भारत में भी अनेक स्थानों पर काफी मात्रा में उत्पन्न होती है। मूंगफली को गरीबों का मेवा कहा जाता है, परंतु मूंगफली ने संसार में इतना महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया है कि अनेक देशों की आर्थिक और औद्योगिक उन्नति में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान है। मूंगफली की विशेषता यह है कि इसमें मांस की अपेक्षा प्रोटीन की मात्रा अधिक है। केवल सोयाबीन और खमीर को छोड़कर सभी सब्जियों और अंडे आदि से भी प्रोटीन इसमें अधिक होती है।

बहुत से देशों की अर्थव्यवस्था मूंगफली के इर्द-गिर्द घूमती है। अनेक देशों में मूंगफली से बननेवाले उत्पादों में अनेक लोग दिन-रात काम करते हैं। मूंगफली के तेल के अतिरिक्त अन्य बहुत सी चीजों का निर्माण होता है। अनेक वैज्ञानिकों ने मूंगफली से संबंधित महत्त्वपूर्ण आविष्कार किये हैं और उसके गुणों के संबंध में लोगों को अवगत कराया है। मूंगफली में विद्यमान प्रोटीन अत्यंत संतुलित अवस्था में होती है, परंतु इसमें आवश्यक तत्त्व एमीनो एसिड की मात्रा थोड़ी कम होती है और क्योंकि एमीनो एसिड दूध में उचित मात्रा में होता है इसलिए दूध और मूंगफली के संयोग से इस कमी को दूर किया जा सकता है।

यह सभी जानते हैं कि मूंगफली भूनने के बाद प्रयोग में लाई जाती है। इसका कारण यह है कि कच्ची मूंगफली जल्दी से हजम नहीं होती है। भूनने से इसकी पाचकता के गुण में वृद्धि होती है। जैसाकि पहले बताया जा चुका है कि शरीर के में लिए आवश्यक पोषक तत्त्वों की भरपूर मात्रा होने के कारण मूंगफली बहुत ही पौष्टिक आहार है। इसके अतिरिक्त इसका औषधीय गुण भी इसके महत्त्व को बढ़ाता है। मूंगफली का तेल आसानी से हजम हो जाता है। सरलतापूर्वक हजम हो जाने के कारण इसे मलशोधक भी माना जाता है। यदि छोटे बच्चों और गर्भवती माताओं को भुनी हुई मूंगफली दूध और गुड़ के साथ दी जाए तो उनके लिए अत्यंत पौष्टिक आहार सिद्ध होती है।

मूंगफली के तेल के गुण जैतून के तेल के समान होते हैं, जबकि जैतून का तेल बहुत महंगा होता है। इसलिए जैतून के तेल के स्थान पर मूंगफली के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। मूंगफली के तेल की चिकनाई घी से मिलती-जुलती है। मूंगफली खाने से दूध, बादाम और घी की आपूर्ति की जा सकती हे।

अत्यधिक रक्त प्रवाह: मूंगफली के संबंध में अनुसंधान करनेवाले अनेक वैज्ञानिकों का विचार है कि मूंगफली अथवा मूंगफली से बने पदार्थों को खाने से शरीर से होनेवाले रक्त प्रवाह, नाक से रक्त बहने अथवा स्त्रियों के मासिक धर्म के समय अधिक रक्त बहने की स्थिति में लाभ होता है। यदि गर्भवती स्त्रियां गर्भ के दिनों में प्रतिदिन 50-60 ग्राम मूंगफली भली प्रकार चबाकर खाएं तो शिशु के शारीरिक विकास में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आती। दूध के साथ मूंगफली खाने से माताओं के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

मोटापा: मूंगफली की एक विशेषता यह है कि इसे यदि दूध के साथ खाया जाए तो शरीर का मोटापा बढ़ता है। परंतु दोपहर के भोजन से पूर्व भूनी हुई मूंगफली बिना दूध और चीनी की चाय अथवा काफी के साथ खाने से मोटापा कम भी होता है। इस प्रकार मूंगफली का प्रयोग करने से भूख कम लगती है और धीरे-धीरे शरीर का भार कम होने लगता है।

मूंगफली में नियासिन की अधिकता के कारण यदि मधुमेह के रोगी प्रतिदिन भुनी हुई मूंगफली का प्रयोग करते रहें तो उनके शरीर में पौष्टिक तत्त्वों की कमी नहीं हो पाती। सर्दियों में जिन औरतों अथवा पुरुषों के होठ फट जाते हैं, उन्हें चाहिए कि वे स्नान करने से पूर्व मूंगफली का थोड़ा-सा तेल हथेली पर लेकर उंगली से रगड़ते हुए भली प्रकार होठों पर लगायें। इसका यह लाभ होता है कि जो महिलाएं होठों पर लिपस्टिंक आदि का अधिक प्रयोग करती हैं, लिपस्टिक साफ करने पर उनके होठ बहुत नीरस दिखाई देते हैं। यदि वे होठों पर मूंगफली का तेल धीरे-धीरे लगाएं तो उनके होठों की चमक बनी रहती है। वे नीरस नहीं दिखाई देते

मूंगफली भली प्रकार चबाकर खाने से दांतों और मसूढ़ों को भी शक्ति मिलती है और दांतों की चमक के लिए हानिकारक कीटाणु नष्ट होते हैं। परंतु यह आवश्यक है कि मूंगफली खाने के बाद मुंह को कुल्ले द्वारा साफ कर लिया जाए ।

सौंदर्यप्रसाधन के रूप में: मूंगफली के तेल का यदि नियम से मुख-मालिश के लिए उपयोग किया जाए तो इससे कील-मुंहासे होने बंद हो जाते हैं। कील-मुंहासों और मुख की त्वचा के निखार के लिए आवश्यक है कि मूंगफली के तेल में दो चम्मच दूध और थोड़ा नींबू का रस मिलाकर रात्रि को सोने से पहले मुख पर मलें। इससे त्वचा पुष्ट होकर चेहरे के रंग में निखार आता है। चेहरे की खुश्की और उसका निस्तेज दिखाई देना समाप्त हो जाता है। जिन महिलाओं के मुख की त्वचा सूखी और खुश्क हो, उनके लिए यह प्रयोग बहुत लाभदायक है।

सर्दियों के दिनों में सभी की त्वचा पर एक प्रकार की खुश्की दिखाई देने लगती है। उस समय मूंगफली के तेल में गुलाब जल और दूध मिलाकर शरीर पर मालिश करनी चाहिए। यदि हाथ-पांव, मुख और गर्दन आदि पर कुछ मैल जमने की झलक दिखाई दे, तो इसमें से एक चम्मच तेल अलग लेकर उसमें नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर चेहरे, गर्दन और हाथों पर मलना चाहिए। इस प्रकार शरीर और मुख की मालिश के आधे घंटे बाद गरम पानी में नींबू का रस मिलाकर स्नान करने से शरीर में एक विशेष प्रकार की ताजगी आती है।

मूंगफली के अत्यधिक मात्रा में पैदा होने और पोषक तत्त्वों से भरपूर रहने के कारण इसे अनेक प्रकार से खाने के काम में लिया जाता है। कुछ पश्चिमी देशों में मूंगफली को पीसकर उसका आटा काफी मात्रा में प्रयोग में लाया जाता है। इसे गेहूं के आटे से भी पोषक माना जाता है। मूंगफली को पीसकर स्वादिष्ट और पोषक दूध का निर्माण भी किया जाता है। छिली हुई मूंगफली को पीसकर इसमें तीन गुना पानी मिलाने से दूध तैयार हो जाता है। इसको उबालकर इससे दही भी बनाया जा सकता है।

 

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