अंग्रेजों से अपमान का बदला लेने के लिए इस आदमी ने खड़ी कर दी यह होटल, इस तरह का हे उनका ये सफर…

जमशेदजी टाटा ने इस होटल की नींव रखी थी। हुआ ये था कि ब्रिटिश समय में एक बार उन्हें वहां के सबसे भव्य होटलों में प्रवेश से मना कर दिया गया था। उन्हें यह कहा गया था कि यह केवल ‘गोरे’ तक ही सीमित है, यानी सिर्फ अंग्रेजों की ही एंट्री होती थी। जमशेदजी टाटा ने इसे पूरे भारतीयों का अपमान समझा और फिर फैसला किया कि वह एक ऐसा होटल बनाएंगे जहां न केवल भारतीय बल्कि विदेशी भी बिना किसी प्रतिबंध के रह सकें। बस इसके बाद ही उन्होंने लग्जरी होटल ताज की नींव रखी और इस तरह भारत का पहला सुपर-लग्जरी होटल अस्तित्व में आया। वर्तमान में ताज पूरी दुनिया में आकर्षण का केंद्र है।

2008 के मुंबई हमले के बाद कई उतार-चढ़ावों के बावजूद, ताज लक्जरी होटल श्रृंखला ने विशेष रूप से भारत के अपने घरेलू बाजार में विचार, परिचित, सिफारिश और प्रतिष्ठा के लिए ब्रांड फाइनेंस के ‘ग्लोबल ब्रांड इक्विटी मॉनिटर’ पर बहुत अच्छा स्कोर किया।

जो इस शहर की खूबसूरती में चार बढ़ाता है। ताज की नींव टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा ने 1898 में रखी थीं। 31 मार्च, 1911 को गेटवे ऑफ इंडिया की नींव रखे जाने से पहले ही होटल ने 16 दिसंबर, 1902 को पहली बार मेहमानों के लिए अपने दरवाजे खोले। ताजमहल पैलेस बिजली से जगमगाने वाली बॉम्बे की पहली इमारत थी। होटल दो अलग-अलग इमारतों से बना है। ताज महल पैलेस और टॉवर, जो ऐतिहासिक और स्थापत्य रूप से एक दूसरे से अलग हैं। ताज महल पैलेस बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया गया था, जबकि टॉवर 1973 में खोला गया था।

ताज होटल की क्वालिटी और आतिथ्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया है। क्योंकि ताज को ब्रांड फाइनेंस द्वारा दुनिया में सबसे मजबूत होटल ब्रांड का दर्जा दिया गया है।

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